
◆ महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने बताया- अयोध्या, मथुरा और संभल का आध्यात्मिक महत्व।
◆ बोले- आज संभल भयमुक्त, हर जुबान पर गूंज रहा राम-राम।
◆ 4 से 8 अप्रैल तक संभल के बहजोई में बडे मैदान पर आयोजित हो रही है श्रीमद् राम कथा।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। जनपद की पावन धरा इन दिनों भक्ति और आस्था के रंग में रंगी हुई है। बहजोई के बड़े मैदान पर आयोजित श्रीमद् राम कथा में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर धर्म लाभ ले रहे हैं। जहां श्री राम कथा के तीसरे दिन निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने मर्यादा और भक्ति का संदेश दिया। जहां कथा के दौरान पूरा वातावरण राममय हो गया है और श्रद्धालु राम कथा के रस में सराबोर नजर आ रहे हैं। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि महाराज ने अपने प्रवचनों में अयोध्या, मथुरा और संभल की धार्मिक महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि आज संभल भयमुक्त है और यहां रहने वाला हर व्यक्ति “राम-राम” कहता है। उनके विचारों ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और विश्वास की नई ऊर्जा भर दी।
उन्होंने कहा कि संभल की रक्षा स्वयं देवाधिदेव भगवान संभलेश्वर महादेव करते हैं, जिससे यह भूमि विशेष रूप से पवित्र और सुरक्षित है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भगवान का भोजन अहंकार है, इसलिए साधु-संत सदैव विनम्र और झुके हुए रहते हैं।
सोमवार को जनपद संभल के जिला कलैक्ट्रेट के बड़ा मैदान में कैलाशानंद गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं की उत्सुकता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि जब 5 दिन की कथा में इतनी अधिक श्रद्धा और भीड़ देखने को मिल रही है, तो 9 दिन की कथा में भक्तों का उत्साह और भी बढ़ेगा।

जहां उन्होनें यज्ञ, गुरु, परंपरा तथा मन की शांति पर विशेष प्रवचन दिए। महामंडलेश्वर ने अपने प्रवचनों में भगवान राम, भगवान कृष्ण और भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान राम ने अयोध्या को, भगवान कृष्ण ने मथुरा को और भगवान शिव ने संभल को चुना, जहां भविष्य में भगवान कल्कि का अवतार होगा।
4 अप्रैल से 8 अप्रैल तक चलने वाली इस पांच दिवसीय श्रीमद् राम कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और भक्ति का आनंद ले रहे हैं। आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

उन्होंने अयोध्या, मथुरा और संभल की महिमा का वर्णन किया, साथ ही यज्ञ, गुरु, परंपरा तथा मन की शांति पर विशेष प्रवचन दिए।
आगे बोलते हुए महामंडलेश्वर गिरी ने कहा उत्तर प्रदेश सहित भारत क जिन सभा राज्यों में, जहां सनातनी परंपराओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षकों की सरकारें हैं, वहाँ के हर अधिकारी को वर्ष में कम से कम एक कथा आयोजित करने का निर्देश मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके शिष्य डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने इस पहल की शुरुआत की है, और यह संदेश पूरे देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी फैल गया है।

संभल पर बोलते हुए महामंडलेश्वर ने कहा, ‘आज संभल भयमुक्त है। अब किसी को सुबह 5 बजे उठने या 6 बजे यहाँ से जाने की ज़रूरत नहीं है। अब आप रात को अकेले 1 बजे भी यहाँ से निकल सकते हैं। यदि कोई कुछ कहे तो जिलाधिकारी को बता देना। अब या तो वह संभल में रहेगा तो राम-राम कहेगा, और यदि संभल में नहीं रहेगा तो वह अपनी मर्जी से नाम का जप करेगा।’ वैसे भी राम राज्य वह है जहाँ हर राज्य, देश और घर में राम की चर्चा हो।
प्रत्येक व्यक्ति के मानस पटल पर राम का नाम हो, मुख में राम नाम हो, कानों में राम नाम की गूँज पड़े, हाथों में राम नाम की माला हो और जुबान पर ‘जय सियाराम’ हो। उन्होंने सभी से अपने तन, मन और वाणी को पवित्र करने का आह्वान किया। जहां श्रीमद् राम कथा में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
जहां प्रदेश भर से सैकड़ों जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का माहौल छाया रहा, जहां हर ओर राम नाम की गूंज सुनाई दी।
















