मानवता शर्मसार! अस्पताल में मृत्यु के बाद भीख मांग कर चुकाया बिल, फिर भी नहीं दिया शव।

मानवता के दुश्मन बने धरती के भगवान, सड़क हादसे में घायल के बाद अस्पताल में कराया था बेटे को भर्ती।

बेटे का शव लेने के लिए डेढ़ लाख में अपना घर भी गिरवीं रखा, फिर भी कम रह गई रकम तो मांगी भीख।

अंत में पुलिस लेकर पहुंचा मजबूर पिता, तब जाकर मिला शव।

अस्पताल डॉक्टर ने कहा- आर्थिक स्थिति को देख कुछ दवाइयां मुफ्त दी गईं, और शव भी दिया गया।

प्रवाह ब्यूरो
बदायूं। बरेली के एक निजी अस्पताल का मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सड़क हादसे में घायल बेटे के इलाज के बाद उपचार के दौरान मृत्यु होने पर बिल जमा नहीं करने पर शव नहीं दिया गया, इसके लिए पिता को सड़क पर भीख मांगनी पड़ी और गांव वालों से सहयोग लेना पड़ा उसके बाद पुलिस के सहयोग से अस्पताल ने एक पिता को उसके मृत बेटे का शव दिया।
हालांकि अस्पताल ने दावा किया है कि कुछ दवाइयां आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुफ्त में दी गई थी और सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, अस्पताल के बाहर भीख मांगने जैसी कोई भी घटना नहीं हुई है।
बदायूं के दातागंज कोतवाली इलाके के नगरिया गांव का रहने वाला धर्मपाल बीते एक दिसंबर को सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। सरकारी अस्पताल में सही इलाज नहीं मिलने के चलते परिजनों ने बरेली के निजी अस्पताल ओमेगा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।
जहां लगातार 14 दिन तक इलाज चल और अस्पताल द्वारा बिल बनाकर तैयार कर दिया गया। इलाज के दौरान धर्मपाल की मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि बिल 3 लाख 10 हजार रुपए हो गया था। उसके बाद अस्पताल वालों ने कह दिया कि आपका बेटा मर चुका है। फिर क्या मजबूर पिता गिरगिड़ता रहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी और अस्पताल ने शव देने से इनकार कर दिया।
उसके बाद पिता अपने घर आ गया और गांव वालों से भीख के रूप में सहयोग लिया कुछ उधार लिया तथा डेढ़ लाख रुपए में अपना घर भी गिरवी रख दिया।
वहीं कुछ लोगों से सड़क पर भी भीख मांगी। झोली फैलाकर बेटे के शव को अस्पताल से लेने के लिए सड़क पर लोगों से रुपए की भीख मांगते हुए पिता का वीडियो भी वायरल है।

जहां किसी तरह एक मजबूर पिता ने 2 लाख 80 हजार रुपए की रकम जमा कर दी। 30 हजार रुपए की रकम रहने के बाद भी डॉक्टरों द्वारा जब शव नहीं दिया गया तो उसने पुलिस का सहयोग लिया।
जहां पुलिस की सहायता से उसके बेटे का शव मिला और गांव लेकर पहुंचा उसके बाद अंतिम संस्कार किया।
अस्पताल द्वारा मानवता को शर्मसार करने का यह मामला बरेली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किया गया। गांव में लोग यही चर्चा करते दिखाई दिए की धरती के भगवान आखिर ऐसे कैसे हो गए।

अस्पताल ने आरोपों को किया खारिज, बोले- फिर माफ कर दिया गया था।

इस मामले के बाद ओमेगा हॉस्पिटल के प्रबंधन ने सभी आरोपी को गलत ठहराया है। अस्पताल का कहना है कि उनका पूरा बिल माफ कर दिया गया था। आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ दवाइयां भी मुफ्त में दी गई थीं। अस्पताल ने कहा है कि सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं वहां भीख मांगने जैसी कोई भी घटना नहीं हुई है। उन्होंने बताया है कि परिजनों ने कोई भी बिल का भुगतान नहीं किया था और मृत्यु के बाद पूरा बिल माफ कर दिया गया।

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