केक नहीं, पौधों से जन्मदिन मना, पेश की अनोखी मिशाल।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश: जन्मदिवस को बनाया हरियाली का उत्सव।

◆ पेशे से प्रधान अध्यापक बृजेश धनगर, समाज सेवा में भी रहते हैं अग्रणी।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। सोमवार को पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा का प्रेरक उदाहरण पेश करते हुए पेशे से प्रधान अध्यापक बृजेश धनगर ने अपने जन्मदिवस को सादगी और सार्थकता के साथ मनाया। उन्होंने केक काटने के बजाय 108 पौधों का रोपण कर जन्मदिन को हरियाली के उत्सव में बदल दिया। जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें मित्रों, परिजनों एवं शुभचिंतकों की ओर से व्यक्तिगत एवं सोशल मीडिया आदि माध्यमों से बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। जहां उत्तर प्रदेश सरकार में एससी-एससटी आयोग की सदस्य गीता प्रधान, लोकप्रिय पत्रकार, प्रखर वक्ता डा. गौरव उन्मुक्त एवं पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष सोहनलाल श्रीमाली जी ने भी उन्हें बधाई देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर बृजेश धनगर ने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के खास पलों को प्रकृति से जोड़ना चाहिए। पौधारोपण न केवल पर्यावरण को स्वच्छ बनाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य की नींव भी रखता है।
कार्यक्रम में स्थानीय लोगों व युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पौधों की देखभाल का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर उनकी मां सावित्री देवी ने भी उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हुए इस सराहनीय पहल को निरंतर बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। इस पुनीत कार्य में में उनकी धर्मपत्नी भी पीछे नहीं रही जहां उन्होंने पति के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में स्कूली छात्रों को कपड़े आदि वितरित कर जन्मदिन मनाया।

बता दें कि ब्रजेश धनगर स्वर्गीय मा. डालचंद पाल के ज्येष्ठ पुत्र हैं। स्वर्गीय डालचंद पाल भी समाज सेवा एवं संगीत के क्षेत्र में सदैव सक्रिय रहा करते थे। वंशानुगत संस्कारों के असर के चलते ही आज पूर्वजों की सीख को आगे बढ़ाते हुए बृजेश धनगर समाज सेवा में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। कक्षा से समाज तक सेवा का जज़्बा रखने वाले प्रधान अध्यापक बृजेश धनगर ने समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। जहां वह वर्तमान में रुस्तमपुर/पीपल वाला के प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ हैं, स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो वह न सिर्फ कक्षा में ही बच्चों को मेहनत से पढ़ते हैं बल्कि बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं में भी यथासंभव सहयोग करते हैं। इसके अलावा क्षेत्र में होने वाले समाज सेवा के प्रत्येक कार्य में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, यही वजह है की क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता निरंतर बनी हुई है।
समाज सेवा के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने वाले बृजेश धनगर शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं। उनके इस कदम की क्षेत्र में सराहना की जा रही है और लोग इसे अनुकरणीय पहल बता रहे हैं।
बृजेश धनगर की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि व्यक्तिगत खुशी के अवसरों को भी जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जा सकता है।

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