अब जनशिकायतों के निस्तारण पर तय होगी थाने-चौकियों में तैनाती।

◆ थानों और आउटपोस्ट में तैनाती को लेकर डीजीपी राजीव कृष्ण के सख्त निर्देश।

◆ जनशिकायतों के निस्तारण में कमी पर सख्ती, समीक्षा के बाद लिया गया ये फैसला।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब थानों और चौकियों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का आधार जनशिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण होगा। इस संबंध में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि जिलों में की जा रही समीक्षा के दौरान जनशिकायतों के निस्तारण में कई स्थानों पर कमी पाई गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए निर्णय लिया गया है कि अब थानों और आउटपोस्ट में तैनात पुलिसकर्मियों के कार्य प्रदर्शन का आकलन भी जनशिकायतों के समाधान के आधार पर किया जाएगा।
दरअसल, पिछले कुछ समय से समीक्षा के क्रम में थाना और चौकियों के स्तर पर जनशिकायतों की सुनवाई में उदासीनता का मामले सामने आ रहे थे। अब ऐसे जिलों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण के स्तर पर हुई समीक्षा के क्रम में जिलास्तरीय अधिकारियों को साफ किया गया कि आम लोगों की समस्याओं को हर हाल में दूर किया जाना चाहिए। जनशिकायतों का प्रभावी निस्तारण होना चाहिए। इसी आधार पर पुलिस अधिकारियों की थाने और चौकियों में तैनाती मिलनी चाहिए।

जनशिकायतों के निस्तारण का मामला डीजीपी राजीव कृष्ण की अपराध समीक्षा बैठक में उठा। इस दौरान जनशिकायतों के निस्तारण में पीछे रहे जिलों के पुलिस अधिकारियों को डीजीपी ने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए थानों-चौकियों पर तैनाती के आधार के रूप में भी शामिल किया जाए। मतलब, थाना-चौकियों पर जनशिकायतों को निस्तारित करने में सफलता के आधार पर पुलिस अधिकारियों की रेटिंग तय होगी। इसी आधार पर उन्हें थाना-चौकियों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
डीजीपी ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपराध समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी जिलों को जनशिकायतों में 40 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य दिया था। समीक्षा में पाया गया कि संभल, फिरोजाबाद और इटावा में जनशिकायतों में करीब 70 फीसदी की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों की प्रशंसा की। प्रदेश के 15 जिलों में जनशिकायतों में 40 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। जबकि लखनऊ, कानपुर और वाराणसी समेत 48 जिलों में जनशिकायतों में 30 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों में जनसुनवाई को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही, जिन जिलों में जनशिकायतों की प्रभावी सुनवाई नहीं हो पाई है, वहां तत्काल स्थिति में सुधार का निर्देश दिया गया।
साथ ही डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे नियमित रूप से जनशिकायतों की समीक्षा करें और लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कराएं, ताकि पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का विश्वास मजबूत हो सके।

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