◆ बोले- SIR पूरा होते ही चुनावी तारीखों का होगा औपचारिक ऐलान।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। यूपी के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा इशारा दिया है। राजभर के बयान के बाद पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों और आम जनता को चुनाव टलने की आसार वाली चिंता से मुक्ति मिल गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। सुल्तानपुर दौरे के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पंचायत चुनाव को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि पंचायत चुनाव में किसी तरह की देरी नहीं होगी। सरकार पूरी तैयारी के साथ पंचायत चुनाव कराने जा रही है। आने वाले दिनों में चुनाव को लेकर औपचारिक घोषणाएं भी हो सकती हैं। इस विषय पर राजभर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पंचायत चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा की है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि फिलहाल प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी ‘एसआईआर’ कार्यक्रम में लगे हुए हैं। जैसे ही यह काम पूरा होगा, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। राजभर के अनुसार SIR का काम 6 फरवरी तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद प्रशासन पूरी तरह से पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुट जाएगा। उन्होंने कहा कि SIR पूरा होते ही चुनाव की तारीखों को लेकर औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। बता दें कि पिछले कुछ समय से पंचायत चुनाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कहीं कहा जा रहा था कि चुनाव टल सकते हैं, तो कहीं तारीख आगे बढ़ने की बातें हो रही थीं। ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार संविधान और नियमों के अनुसार ससमय चुनाव कराएगी।
◆ योगी सरकार का आदेश, पहले 14 जनवरी को रखा था ऑप्शनल।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। मकर संक्रांति को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे लाखों कर्मचारियों, छात्रों और दफ्तरों की योजना अब नए सिरे से बनेगी। बता दें कि प्रदेश की योगी सरकार ने मकर संक्रांति के अवकाश में बदलाव किया है। पहले सरकार ने 14 जनवरी 2026 को निर्बंधित (वैकल्पिक) अवकाश घोषित किया था, लेकिन अब इसकी जगह 15 जनवरी 2026, गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। जिसके लिए शासन ने संशोधित आदेश भी जारी कर दिया है। नए आदेश के मुताबिक अब 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को प्रदेशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इससे पहले यह अवकाश 14 जनवरी 2026 (बुधवार) के लिए घोषित किया गया था।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी की रात पड़ रहा है, जबकि उसका धार्मिक और पारंपरिक प्रभाव 15 जनवरी को माना जा रहा है। इसी कारण शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि पहले घोषित 14 जनवरी के अवकाश के स्थान पर 15 जनवरी को अवकाश रखा जाए। संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के अंतर्गत सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इस दिन बैंक, सरकारी कार्यालय और अधिकतर सार्वजनिक संस्थान बंद रहेंगे। साथ ही मकर संक्रांति का सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के बाद 2026 में 26 राजकीय अवकाश हो जाएंगे। पहले जारी सूची के अनुसार 25 सार्वजनिक अवकाश थे। अब मकर संक्रांति की छुट्टी भी घोषित होने के बाद निर्बंधित (ऑप्शनल) अवकाश 31 बचेंगे। गणतंत्र दिवस और होलिका दहन सोमवार पड़ रहे हैं, इनसे पहले शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने से दफ्तरों में लगातार तीन-तीन दिन छुटि्टयां रहेंगी।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। प्रदेश में लगातार बढ़ रही शीतलहर और भीषण ठंड को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत समस्त प्रकार के माध्यमिक विद्यालयों को 5 जनवरी तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। तेजी से गिरते तापमान और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए। ठंड से बचाव को लेकर लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की गई है।
जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बहुत ज्यादा ठंड के समय में स्टूडेंट्स घर से अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए सुरक्षित रहें। मौसम ठीक रहने पर 6 जनवरी से स्कूल फिर से खुलने की उम्मीद है। वहीं, अभिभावकों और छात्रों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। यह फैसला तब आया है जब कई जिलों में तापमान रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसी कारण अधिकारियों को छात्रों और निवासियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों को सतर्क रहने के साथ फील्ड इंस्पेक्शन करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को कहा गया है कि वे सभी जिलों में कंबल और अलाव आदि का इंतजाम करें। जिससे ठंड से बचाव मिल सके। साथ ही कहा है कि कोई भी व्यक्ति खुले में ना सोए इसके लिए अधिकारियों को नाइट शेल्टर में सभी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। अधिकारियों को सभी नाइट शेल्टर में पूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। जिससे रहने वालों को खाना और बेसिक सुविधाएं मिल सकें। सीएम योगी ने जोर दिया कि सभी अधिकारी एक्टिव रहें। रेगुलर तौर पर जिलों का इंस्पेक्शन करें। साथ ही कोल्ड वेव की तैयारियों को लेकर रिपोर्ट दें। इन उपायों में नाइट शेल्टर बनाए रखना, कंबल और अलाव के लिए फ्यूल की सप्लाई पक्का करना, और लोगों को रात में बाहर रहने से रोकने के लिए लोकल अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेटर करना शामिल है। इस दौरान लोगों से अपील की गई है कि वे ऑफिशियल गाइडलाइंस का पालन करें।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने मंगलवार को जारी किया नया अवकाश कैलेंडर।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने वर्ष 2026 के लिए नया अवकाश कैलेंडर मंगलवार को जारी कर दिया। इसके मुताबिक प्रदेश के राजकीय माध्यमिक स्कूलों में नए कैलेंडर वर्ष में 365 में 238 दिन पढ़ाई होगी और 112 दिन त्योहारों, रविवार व अन्य अवकाश रहेगा। जबकि बोर्ड की परीक्षा 15 दिन होगी। अवकाश कैलेंडर में ग्रीष्मावकाश, त्योहारों एवं अन्य सार्वजनिक अवकाशों को शामिल किया गया है। निदेशक ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में निर्धारित शैक्षणिक दिवसों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। कैलेंडर जारी होने के साथ ही सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि वे शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन नए कैलेंडर के अनुसार सुनिश्चित करें। नए अवकाश कैलेंडर से विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को वर्ष भर की शैक्षणिक योजना बनाने में सुविधा मिलेगी।
विशेष परिस्थितियों में स्थानीय आवश्यकता के अनुसार प्रधानाचार्य विवेकाधीन की तीन छुट्टी कर सकेंगे। विवाहित शिक्षिकाओं को करवा चौथ की छुट्टी मिलेगी। क्षेत्र विशेष में हरि तालिका तीज या हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी, अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली शिक्षिकाओं को प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रधानाध्यापक या प्रधानाचार्य स्तर से कोई दो छुट्टी दी जाएगी। डीएम के निर्देश पर स्थानीय अवकाश दिए जाएंगे। जबकि जारी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में माध्यमिक विद्यालयों में कुल 112 दिन अवकाश रहेगा व 238 दिन शैक्षणिक कार्य संचालित किया जाएगा।
◆ छात्रों के बौद्धिक विकास की पहल, समसामयिक ज्ञान पर फोकस।
◆ अपर मुख्य सचिव का पत्र जारी, रोजाना दस मिनट होगा समाचार वाचन।
◆ आदेश के बाद कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में अनिवार्य हुई अखबारों की उपलब्धता।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अब स्कूलों में नया नियम लागू कर दिया गया है। इस नियम के तहत अब सभी सरकारी एवं माध्यमिक स्कूलों में प्रार्थना के बाद अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के बौद्धिक विकास और समसामयिक ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे लागू किया गया है। अब प्रदेश के स्कूलों में प्रार्थना सभा के बाद प्रतिदिन विद्यार्थियों को समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य होगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव पार्थ शर्मा द्वारा सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के अनुसार कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए रोजाना कम से कम दस मिनट का समाचार वाचन कराया जाएगा, जिससे छात्रों में पढ़ने की रुचि बढ़े और वे देश-दुनिया की गतिविधियों से अपडेट रहें। नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में हिंन्दी एवं अंग्रजी के अखबारों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। शिक्षक छात्रों को महत्वपूर्ण खबरों की व्याख्या भी करेंगे, ताकि विद्यार्थी समाचारों को समझ सकें और उन पर विचार कर सकें। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों की भाषा क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और सामान्य ज्ञान में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। इसका उद्देश्य शिक्षा को बेहतर बनाना, पढ़ने की आदत को विकसित करने के साथ ही सामान्य ज्ञान को बेहतर करना है। छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करने, मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करने के साथ-साथ तार्किक और आलोचनात्मक सोच को मजबूत करने के उद्देश्य से अखबार पढ़ना अनिवार्य किया गया है। आदेश के अनुसार, स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के अखबार उपलब्ध कराए जाएंगे और इन्हें स्कूल की दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा। बच्चों में लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। स्कूलों में दोनों हिंदी और इंग्लिश भाषाओं के अखबार दिए जाएंगे। इस पहल के जरिये बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, हर क्षेत्र से जोड़ना है। यूपी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि इस पहल से न सिर्फ बच्चों की वोकैबलरी मजबूत होगी बल्कि उन्हें रोजाना नए-नए शब्द सीखने का मौका मिलेगा। विभाग की ओर से जारी नियम के अनुसार अब स्कूलों में हिंदी और इंग्लिश में न्यूज पेपर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका मतलब है कि सरकारी पैसे से ही अखबार खरीदे जाएंगे। पेपर पढ़ने के बाद से बच्चों से बड़ी खबरों के बारे में पूछा जाएगा। इसके साथ ही उन्हें 5 शब्द भी बताने होंगे, जो उन्होंने न्यूज पेपर से सीखे हैं। जारी आदेश में इस बात का भी जिक्र है कि अखबारों में मौजूद सुडोकू, क्रॉसवर्ड और शब्द पहेलियां भी छात्रों की सोच को विकसित करेंगी और उन्हें तर्क करने में मदद करेगी। इससे उनके मन में कई सवाल पैदा होंगे। अपर मुख्य सचिव पार्थ शर्मा ने बताया कि अलग-अलग सब्जेक्ट के आर्टिकल को पढ़ने से छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित होगी। जिससे वह सही व गलत खबर के बीच फर्क पहचान पाएंगे।
◆ कफ सिरप का कटआउट लेकर साइकिल से विधानसभा पहुंचे सपा विधायक ब्रजेश यादव।
◆ कफ सिरप को लेकर सपा का दावा, कहा- गरीब बच्चों की मौत के लिए भाजपा जिम्मेदार।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। यूपी के विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सपा विधायक ब्रजेश यादव ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। वे साइकिल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे और साथ में एक कटआउट भी चस्पा किया जो जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत के खिलाफ उनका विरोध दर्शाता है। उनकी साइकिल पर लगे कटआउट में लिखा कि, ‘जादुई कफ सिरप, पीने वाला मर जाता है. बेचने वाला दौलतमंद हो जाता है। सत्ता का संरक्षण पाता है। फिर विदेश निकल जाता है। यह प्रदर्शन ग्रामीण और गरीब परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाता है। विधायक ब्रजेश यादव ने कहा, ‘हमारे राज्य और पूरे देश में चर्चा हो रही है कि भाजपा ने जहरीले कफ सिरप बांटे, जिससे गरीबों के बच्चे मारे गए। लोगों ने पैसे कमाए और विदेश भाग गए। किन्तु भाजपा सरकार उन्हें बचाने में लगी है। बल्कि सरकार को ऐसे लोगों को तुरंत गिरफ्तार करके जेल भेजना चाहिए।
इतना ही नहीं सपा विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है। विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से और हंगामा होने की संभावना है। बता दें कि हाल के महीनों में देश में कफ सिरप से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में कोल्डरिफ नाम के कफ सिरप से 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले केमिकल मिले। इसी तरह राजस्थान और अन्य राज्यों में भी इसके कई मामले रिपोर्ट हुए। इसके अलावा यूपी में भी कोडीन-बेस्ड कफ सिरप की अवैध सप्लाई का बड़ा रैकेट पकड़ा गया, जिसकी जड़ें वाराणसी तक बताई जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दवा नियमन में सख्ती की जरूरत है ताकि ऐसी त्रासदियां दोहराई न जाएं। जिसको लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि यह हजारों करोड़ का घोटाला है जिसमें भाजपा सरकार संरक्षण दे रही है। सपा ने इस शीतकालीन विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का ऐलान किया है। विधानसभा सत्र में सपा विधायकों ने अन्य मुद्दों जैसे बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और मतदाता सूची से नाम कटवाने के आरोप आदि पर भी विरोध किया। फिलहाल इस विरोध प्रदर्शन पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
◆ जानें अभ्यर्थी की योग्यता से लेकर आवेदन तक की सभी डिटेल्स।
◆ कुल 41,424 पदों के साथ कानपुर में सबसे ज्यादा तो भदोही में सबसे कम पदों पर होगी भर्ती।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए होमगार्ड्स की व्यापक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। जहां पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने मंगलवार से 41,424 रिक्त पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसंबर निर्धारित की गई है।
भर्ती बोर्ड के अनुसार आवेदन करने से पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य बनाया गया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत 3 नवंबर को ही की जा चुकी थी और तब से अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन भी कर चुके हैं। जारी किए नोटिफिकेशन के अनुसार होमगार्ड्स अभ्यर्थियों के लिए सबसे अधिक पद कानपुर में जबकि सबसे कम पद भदोही में हैं। प्रदेश में होमगार्ड स्वयंसेवकों के 1.18 लाख पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में 73 हजार कार्यरत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विगत जून माह में ही होमगार्ड भर्ती करने का निर्देश दिया था। इस अधिसूचना में कुल 41,424 होमगार्ड पदों की घोषणा की गई है। जहां 10वीं पास पुरुष और महिला उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 18 नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 17 दिसंबर 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। ध्यान रहे, आवेदन करने से पहले ओटीआर (वन-टाइम रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य है। शैक्षिक योग्यता के लिए अभ्यर्थी ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा पास की हो। साथ ही उम्मीदवार की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 01 जुलाई 1995 से पहले नहीं और 01 जुलाई 2007 के बाद का नहीं होना चाहिए।
आवेदन के समय हाई स्कूल की मार्कशीट या प्रमाणपत्र अपलोड करना आवश्यक है, ताकि शैक्षणिक योग्यता की पुष्टि की जा सके। सामान्य, ईडब्ल्यूएस व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 400 रुपए निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को केवल 300 रुपए जमा करने होंगे। शासनादेश के अनुसार, लिखित परीक्षा 100 नंबरों की होगी। इसमें ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएंगे। 2 घंटे की परीक्षा होगी। परीक्षा का पाठ्यक्रम उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड तय करेगा। फिजिकल परीक्षा पास करने के लिए पुरुषों को 28 मिनट में 4.8 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। जबकि महिलाओं को 16 मिनट में 2.4 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर जिलावार मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। जिले में उपलब्ध रिक्तियों के दृष्टिगत पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। डीवीपीएसटी के लिए जिले स्तर पर डीएम या डीएम की ओर से नामित किसी डिप्टी कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। इसमें एसपी या एसपी की ओर से नामित कोई डिप्टी एसपी सदस्य होगा। इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक व सीएमओ या उनकी ओर से नामित राजपत्रित अधिकारी व चिकित्साधिकारी सदस्य होगा। भर्ती में सरकारी नियमों के अनुसार महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रितों को 2 फीसदी, भूतपूर्व सैनिक को 5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा यूपी होमगार्ड भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को वह सभी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी जो आधिकारिक नोटिफिकेशन में दी गई हैं।
◆ 18 फरवरी से एक साथ शुरू होंगे 10वीं, 12वीं के एग्जाम।
◆ पहला पेपर हिंदी तो आखरी एग्रीकल्चर के साथ कुल 23 दिन चलेंगी बोर्ड परीक्षा।
प्रभाह ब्यूरो लखनऊ। यूपी बोर्ड यानी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शिक्षा सत्र 2026 के लिए 10वीं और 12वीं की परीक्षा की तारीखें जारी कर दी है। जिसे बुधवार शाम माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी किया गया है। जारी हुई डेट शीट के अनुसार हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक कुल 23 दिन चलेंगी। अब लाखों छात्रों का इंतजार भी अब खत्म हो गया है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पहले दिन हिंदी विषय की परीक्षा होगी। परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली का समय सुबह 8.30 से 11.45 बजे तक है, जबकि दूसरी पाली की परीक्षा का समय दोपहर बाद 2.00 बजे से शाम 5.15 बजे है। इस बार हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा में 27, 50, 943 परीक्षार्थी हैं जबकि इंटरमीडिएट में कुल 24,79,352 परीक्षार्थी हैं। छात्रों को सफलता सुनिश्चित करने के लिए इस समय-सारिणी के अनुसार अपनी पढ़ाई की योजना बनाने हेतु डेटशीट में विषयवार परीक्षा तिथियां स्पष्ट रूप से दी गई हैं, जिससे छात्रों को रणनीतिक योजना बनाने में मदद मिलेगी।
बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने बताया, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए परीक्षा केंद्र पर डबल लॉ वाली चार अलमारियां रखी जाएंगी। वर्ष 2025 की परीक्षा में तीन अलमारियों की व्यवस्था थी। बाद में चौथी अलमारी की व्यवस्था अतिरिक्त प्रश्नपत्र के लिए कराई गई। इस बार शुरू से ही चार अलमारियों की व्यवस्था केंद्र व्यवस्थापकों को रखनी होगी। चौथी अलमारी में अतिरिक्त प्रश्नपत्र रखे जाएंगे। इतना ही नहीं परीक्षा को नकल-मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार भी यूपी बोर्ड ने सख्त कदम उठाने की घोषणा की है। केवल उन्हीं विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, जो CCTV कैमरों से लैस हैं। बोर्ड स्तर पर निरीक्षण टीमों का गठन किया जाएगा, जो परीक्षा केंद्रों की निगरानी और औचक निरीक्षण करेंगी।
◆ 10 जनपदों के डीएम के साथ-साथ कई सीडीओ व कमिश्नर भी बदले।
◆ अजय कुमार द्विवेदी बने डीएम रामपुर, तो वहीं राजा गणपति बनाये गये सीतापुर के नये जिलाधिकारी।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। सीएम योगी ने यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। एक साथ 46 आईएएस अफसरों का तबादला किया गया है। रामपुर, बलरामपुर, कौशांबी, हाथरस और बस्ती सहित 10 जिलों के डीएम बदले गए हैं। मिल रही जानकारी के मुताबिक 27 पीसीएस अधिकारियों को भी इधर से उधर किया गया है। सरकार द्वारा किए गए इन तबादलों में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त सहित कई अहम पदों के अफसरों को नई तैनाती दी गई है। सूबे में कुल 10 जिलों के डीएम बदले गए हैं जिनमें हाथरस, सीतापुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, चित्रकूट, ललितपुर, श्रावस्ती, रामपुर, बलरामपुर और कौशांबी शामिल हैं। शासन ने मेरठ और सहारनपुर के कमिश्नर भी बदल दिए हैं।
तबादले के क्रम में रूपेश कुमार को सहारनपुर का मंडलायुक्त बनाया गया है। जहां भानु गोस्वामी को मेरठ का मंडलायुक्त बनाया गया है। तो वहीं राजेश प्रकाश को विंध्याचंल का मंडलायुक्त बनाया गया है। वाराणसी के मुख्य विकास अधिकारी रहे हिमांशु नागपाल को अब वाराणसी का नगर आयुक्त बनाया गया है, जबकि वाराणसी की एडीएम वंदिता श्रीवास्तव को कुशीनगर का सीडीओ बनाया गया है। पूर्व मंडलायुक्त अटल कुमार राय को सचिव गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह व्यापक फेरबदल शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जन-केंद्रित बनाने के लक्ष्य के साथ किया गया है।
◆ ट्रांसफर लिस्ट से देखिए किसे मिली, कहां तैनाती..?
◆ सौभाग्य के महापर्व पर सुहागिनों का ‘सरगी’ के साथ निर्जला उपवास शुरू।
◆पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है करवा चौथ व्रत।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। करवा चौथ आज सिद्धि योग में मनाया जा रहा है। जहां सुहागन महिलाएं सरगी करके सूर्योदय के समय से ही निर्जला व्रत हैं। आज प्रदोष काल में करवा चौथ पूजा होगी, जिसमें करवा की कथा सुनी जाएगी। यह व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक यानी चंद्रमा को अर्घ देने तक बिना अन्न और जल के रखना होता है। करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है। आज करवा चौथ शुक्रवार के दिन है ज्योतिष के अनुसार शुक्र को भौतिक सुख सुविधा, प्रेम, सुखी वैवाहिक जीवन आदि का कारक माना जाता है। सिद्ध योग में शुरू हुआ करवा चौथ व्रती महिलाओं के मनोकामनाओं की पूर्ति में भी सहायक है। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ पर व्रत पूर्ण होने से पूर्व यौन संबंध बनाना उचित नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे व्रत की पूर्णता प्रभावित होती है। हिंदू धर्म में करवा चौथ का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता रहा है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत सबसे जरूरी माना जाता है और इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। यह त्यौहार पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। पश्चिमी यूपी में आज चांद निकलने का समय 8.24 PM है। पंचांग के अनुसार भी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को रात 10:54 बजे आरंभ होगी और 10 अक्टूबर को रात 7:38 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार भी 10 अक्टूबर को ही करवा चौथ व्रत रखना उचित है। साथ ही इस वर्ष करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त भी 10 अक्टूबर 2025 की शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा, कथा और व्रत संबंधी अनुष्ठान सबसे अधिक प्रभावी और शुभ माने जाते हैं। साथ ही पंचांग के अनुसार भी आज चंद्रोदय समय रात 8:14 बजे है। करवा चौथ का त्यौहार भारतीय विवाहित महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। यही कारण हैं कि करवा चौथ को लेकर कई तरह की मान्यताएं और रीति-रिवाज प्रचलित हैं। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती है। यह व्रत सूर्योदय से चंद्रमा निकलने तक चलता है। जब रात में चांद निकलता है, तो पत्नी चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति का चेहरा देखकर ही व्रत तोड़ती है। व्रत की शुरुआत सुबह-सुबह ‘सरगी’ से होती है, जो कि सास या परिवार की बड़ी महिलाएं व्रती महिला को देती हैं। सरगी में फल, सूखे मेवे, मिठाइयां, हल्का भोजन और कभी-कभी परंपरागत पकवान भी शामिल होते हैं। यह सरगी न केवल शरीर को ऊर्जा देती है, बल्कि यह सास-बहू के रिश्ते में भी आत्मीयता और आशीर्वाद का भाव जोड़ती है। सरगी न सिर्फ एक साधारण भोजन है, बल्कि इसमें गहरी धार्मिक भावना और पारिवारिक संबंधों की मिठास भी छिपी होती है। सरगी का मुख्य उद्देश्य शारीरिक ऊर्जा प्रदान करना है। सरगी सास द्वारा बहू को दी जाती है, जो आशीर्वाद और स्नेह का प्रतीक मानी जाती है। इसे ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय से पहले खाया जाता है, जिससे व्रती महिला दिनभर बिना जल और अन्न के उपवास रख सके। धार्मिक दृष्टि से सरगी सिर्फ ऊर्जा देने वाला भोजन नहीं, बल्कि यह पति की लंबी उम्र, घर में सुख-शांति और सास-बहू के रिश्ते में प्रेम और विश्वास की डोर को मजबूत करने वाली परंपरा भी है।
◆ आखिर कैसे शुरू हुई थी ‘सरगी’ की परंपरा ?
सरगी की शुरुआत को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं, जो इसके धार्मिक व पौराणिक महत्व को दर्शाती हैं।
पहली कथा माता पार्वती से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता पार्वती ने भगवान शिव की दीर्घायु और कल्याण के लिए पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा था, तब उनकी सास जीवित नहीं थीं। ऐसे में उनकी मां मैना देवी ने उन्हें व्रत से पहले सरगी दी थी एक विशेष थाली जिसमें पौष्टिक और शुभ खाद्य पदार्थ थे। तभी से यह परंपरा बनी कि यदि सास जीवित न हों, तो मायके से मां भी सरगी भेज सकती हैं।
दूसरी कथा महाभारत काल से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा और दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था, तब उनकी सास कुंती ने उन्हें सरगी दी थी। इस प्रसंग से यह मान्यता और भी प्रबल हो गई कि सरगी ससुराल पक्ष की ओर से दी जानी चाहिए। खासकर सास की ओर से, जो इसे आशीर्वाद और प्रेम के रूप में अपनी बहू को देती है। ये दोनों कथाओं से स्पष्ट करतीं है कि सरगी की परंपरा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि यह आस्था, मातृत्व, और पारिवारिक रिश्तों की मिठास का प्रतीक है, जो पौराणिक काल से ही चली आ रही है।