अब जनशिकायतों के निस्तारण पर तय होगी थाने-चौकियों में तैनाती।

◆ थानों और आउटपोस्ट में तैनाती को लेकर डीजीपी राजीव कृष्ण के सख्त निर्देश।

◆ जनशिकायतों के निस्तारण में कमी पर सख्ती, समीक्षा के बाद लिया गया ये फैसला।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब थानों और चौकियों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का आधार जनशिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण होगा। इस संबंध में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि जिलों में की जा रही समीक्षा के दौरान जनशिकायतों के निस्तारण में कई स्थानों पर कमी पाई गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए निर्णय लिया गया है कि अब थानों और आउटपोस्ट में तैनात पुलिसकर्मियों के कार्य प्रदर्शन का आकलन भी जनशिकायतों के समाधान के आधार पर किया जाएगा।
दरअसल, पिछले कुछ समय से समीक्षा के क्रम में थाना और चौकियों के स्तर पर जनशिकायतों की सुनवाई में उदासीनता का मामले सामने आ रहे थे। अब ऐसे जिलों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण के स्तर पर हुई समीक्षा के क्रम में जिलास्तरीय अधिकारियों को साफ किया गया कि आम लोगों की समस्याओं को हर हाल में दूर किया जाना चाहिए। जनशिकायतों का प्रभावी निस्तारण होना चाहिए। इसी आधार पर पुलिस अधिकारियों की थाने और चौकियों में तैनाती मिलनी चाहिए।

जनशिकायतों के निस्तारण का मामला डीजीपी राजीव कृष्ण की अपराध समीक्षा बैठक में उठा। इस दौरान जनशिकायतों के निस्तारण में पीछे रहे जिलों के पुलिस अधिकारियों को डीजीपी ने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए थानों-चौकियों पर तैनाती के आधार के रूप में भी शामिल किया जाए। मतलब, थाना-चौकियों पर जनशिकायतों को निस्तारित करने में सफलता के आधार पर पुलिस अधिकारियों की रेटिंग तय होगी। इसी आधार पर उन्हें थाना-चौकियों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
डीजीपी ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपराध समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी जिलों को जनशिकायतों में 40 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य दिया था। समीक्षा में पाया गया कि संभल, फिरोजाबाद और इटावा में जनशिकायतों में करीब 70 फीसदी की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों की प्रशंसा की। प्रदेश के 15 जिलों में जनशिकायतों में 40 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। जबकि लखनऊ, कानपुर और वाराणसी समेत 48 जिलों में जनशिकायतों में 30 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों में जनसुनवाई को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही, जिन जिलों में जनशिकायतों की प्रभावी सुनवाई नहीं हो पाई है, वहां तत्काल स्थिति में सुधार का निर्देश दिया गया।
साथ ही डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे नियमित रूप से जनशिकायतों की समीक्षा करें और लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कराएं, ताकि पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का विश्वास मजबूत हो सके।

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार ने बढ़ाया मानदेय।

◆ शिक्षामित्रों को 18 हजार तो अनुदेशकों को 17 हजार रुपए प्रतिमाह का ऐलान।

नए शैक्षणिक सत्र से मिलेगा बढ़ा मानदेय, शिक्षामित्रों में खुशी की लहर।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। यूपी विधानसभा के बजट सत्र में सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया है।
जहां सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में वृद्धि कर दी है। सरकार के फैसले के अनुसार अब शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपए तथा अनुदेशकों को 17 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। बताया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय नए शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। इस निर्णय के बाद प्रदेश भर के शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण और बेहतर होगा।
अभी मौजूदा वक्‍त में शिक्षा मित्रों को लगभग 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। नए फैसले के बाद उन्हें सीधे 8,000 रुपये की बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।
इसी तरह, अनुदेशकों को अब तक करीब 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता रहा है, जिसे बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया है। यानी उन्हें भी 8,000 रुपये तक की वृद्धि का लाभ मिलेगा।
प्रदेश में करीब 1.50 लाख से अधिक शिक्षामित्र कार्यरत हैं साथ ही लगभग 25,000 अनुदेशक अलग-अलग परिषदीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। इस फैसले से करीब 1.75 लाख कर्मियों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है।
शिक्षा मित्र और अनुदेशक संगठन लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की इस घोषणा को इन वर्गों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

यूपी बोर्ड परीक्षा आज से: 5 अहम बदलाव जो हर छात्र को जानने चाहिए।

◆ अब हर पन्ने पर लिखना होगा अनुक्रमांक और कॉपी नंबर, नकल पर कसेगा शिकंजा।

कॉपी में नाम, चिह्न या पहचान के अलावा रखे रूपये तो सील होगी कॉपी।

8 हजार परीक्षा केंद्रों पर बड़ी तैयारी, 53 लाख से अधिक परीक्षार्थियों की इस बार ए4 साइज में लंबवत होगी उत्तर पुस्तिका।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। एशिया के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में गिने जाने वाले यूपी बोर्ड परीक्षा आज से शुरू हो रही हैं। जिसमें इस बार कई अहम बदलाव किए गए हैं। इस साल करीब 53 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके लिए 75 जिलों में कुल 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए है। नकल पर सख्ती और पारदर्शिता के लिए बोर्ड ने नई व्यवस्था लागू की है। नकलविहीन परीक्षा के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
इसमें से कई बदलावों से छात्रों का स्ट्रेस काफी हद तक कम भी होने वाला है। परीक्षाएं पूरे राज्य में पेन-एंड-पेपर मोड में होंगी। सुबह का सेशन सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक चलेगा, जबकि दोपहर का सेशन दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगा। क्लास 10 और 12 दोनों के लिए पहली परीक्षा हिंदी की है।
इन नियमों के तहत महिला स्टाफ की तैनाती से लेकर जांच के दौरान जूते मोजे उतारने से लेकर कई सारे अहम निर्देश जारी किए गए हैं।
यूपी बोर्ड परीक्षा में जांच के दौरान छात्रों के साथ खराब व्यवहार के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिसके चलते ही परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी और ऑडियो रिकॉर्डिंग के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बोर्ड ने बताया कि इस बार जांच के दौरान छात्रों को जूते और मोजे नहीं उतारने होंगे। बोर्ड ने नकल रोकने के लिए ये फैसला लिया है। अतिसंवेदनशील कैटेगरी में पड़ने वाले केंद्रों की दो बार जांच की जाएगी। वहीं 20 एग्जाम सेंटर्स में जैमर लगाया जाएगा। पहले कॉपियां आड़ी होती थीं अब उन्हें लंबवत कर दिया गया है। साथ ही हर आंसर शीट पर यूनिक नंबर और सुरक्षा चिह्न भी लगाए गए हैं। हर पेज पर रोल नंबर और कॉपी की संख्या लिखना जरूरी है। कॉपी में नाम, चिह्न या फिर पहचान लिखना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। एग्जाम कॉपी में पैसे मिलने पर आंसर शीट को सील कर दिया जाएगा। साथ ही परीक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई भी हो सकती है। बरामद राशि को सरकारी ट्रेजरी में जमा किया जाएगा। घटना की रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजी जाएगी। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि एग्जाम से पहले वे सभी स्टूडेंट्स को ये सभी नियम बता दें।
उत्तर पुस्तिकाओं में चार रंगों में क्रमांक, परिषद का लोगो और UPMSP की सूक्ष्म अंकन जैसा विशेष सुरक्षा फीचर्स जोड़ा गया है, जिससे अदला-बदली रोक जा सके। इस साल पहली बार परीक्षा की ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी की जाएगी। इसके अलावा, ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ के तहत परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी।
राज्य मंत्री गुलाब देवी ने लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। हर परीक्षा कक्ष में दो वॉयस रिकॉर्डर वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के साथ राउटर, डीवीआर और हाई-स्पीड इंटरनेट भी उपलब्ध है। परीक्षा की संपूर्ण लाइव मॉनिटरिंग वेबकास्टिंग के माध्यम से होगी। इन केन्द्रों पर एसटीएफ और स्थानीय टीम लगातार निगरानी करेगी। परीक्षा के संबंध में स्टूडेंट्स और पैरेंट्स को अगर कोई समस्या आती है तो मदद के लिए लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम बनाए गए और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं- टोल-फ्री नंबर 18001806607 और 18001806608 जबकि माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के टोल-फ्री नंबर 18001805310 और 18001805312 भी सक्रिय रहेंगे। साथ ही शिकायत या सुझाव ईमेल, फेसबुक, एक्स (X) और व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं। प्रयागराज मुख्यालय के साथ ही वाराणसी, मेरठ, बरेली और गोरखपुर के क्षेत्रीय कार्यालयों में भी कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं, जिससे परीक्षार्थियों को हर जगह मदद मिल सके।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, लड़कियों की शादी पर अब 1 लाख का अनुदान।

◆ यूपी बजट में महिलाओं और बेटियों पर विशेष फोकस, शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन पर दिखी प्राथमिकता।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार ने लड़कियों की शादी कराने के लिए दिए जाने वाले अनुदान की राशि दोगुना करने की घोषणा कर दी है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस योजना को लागू किया था।
जहां यूपी के इस बजट में महिलाओं और लड़कियों पर फोकस किया गया है। जिसमें गरीब परिवार की बेटियों को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अनुदान राशि दिए जाने का प्रावधान है। अब योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बडी राशि का प्रावधान किया है। यूपी विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सभी वर्ग की लड़कियों के विवाह के लिए अनुदान राशि बढ़ाए जाने की घोषणा की। इस योजना के तहत पहले 51,000 रुपये की राशि अनुदान के तौर पर मिलती थी। यूपी बजट 2026 में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। बजट में योजना के लिए 750 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सीएम योगी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस योजना के जरिए गरीब परिवारों को फोकस किया है। गरीब परिवारों में बेटी की शादी एक बड़ी चुनौती बनती है। ऐसे में अगर सरकार की ओर से एक लाख रुपये की आर्थिक मदद की जाती है तो यह उनके लिए बड़ी राहत होगी। यूपी चुनाव 2027 से पहले सभी वर्ग के लोगों के लिए बजट में किए गए इस प्रावधान से बड़े स्तर पर लोगों को जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

यूपी पंचायत चुनाव पर सस्पेंस खत्म? मंत्री ओपी राजभर के बयान ने दिया बड़ा इशारा।

बोले- SIR पूरा होते ही चुनावी तारीखों का होगा औपचारिक ऐलान।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। यूपी के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा इशारा दिया है। राजभर के बयान के बाद पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों और आम जनता को चुनाव टलने की आसार वाली चिंता से मुक्ति मिल गई है।
उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। सुल्तानपुर दौरे के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पंचायत चुनाव को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि पंचायत चुनाव में किसी तरह की देरी नहीं होगी।
सरकार पूरी तैयारी के साथ पंचायत चुनाव कराने जा रही है। आने वाले दिनों में चुनाव को लेकर औपचारिक घोषणाएं भी हो सकती हैं।
इस विषय पर राजभर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पंचायत चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा की है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि फिलहाल प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी ‘एसआईआर’ कार्यक्रम में लगे हुए हैं। जैसे ही यह काम पूरा होगा, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
राजभर के अनुसार SIR का काम 6 फरवरी तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद प्रशासन पूरी तरह से पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुट जाएगा। उन्होंने कहा कि SIR पूरा होते ही चुनाव की तारीखों को लेकर औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
बता दें कि पिछले कुछ समय से पंचायत चुनाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कहीं कहा जा रहा था कि चुनाव टल सकते हैं, तो कहीं तारीख आगे बढ़ने की बातें हो रही थीं। ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार संविधान और नियमों के अनुसार ससमय चुनाव कराएगी।

मकर संक्रांति की छुट्टी बदली, अब 15 जनवरी को रहेगा सर्वजनिक अवकाश।

योगी सरकार का आदेश, पहले 14 जनवरी को रखा था ऑप्शनल।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। मकर संक्रांति को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे लाखों कर्मचारियों, छात्रों और दफ्तरों की योजना अब नए सिरे से बनेगी।
बता दें कि प्रदेश की योगी सरकार ने मकर संक्रांति के अवकाश में बदलाव किया है। पहले सरकार ने 14 जनवरी 2026 को निर्बंधित (वैकल्पिक) अवकाश घोषित किया था, लेकिन अब इसकी जगह 15 जनवरी 2026, गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा।
जिसके लिए शासन ने संशोधित आदेश भी जारी कर दिया है।
नए आदेश के मुताबिक अब 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को प्रदेशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इससे पहले यह अवकाश 14 जनवरी 2026 (बुधवार) के लिए घोषित किया गया था।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी की रात पड़ रहा है, जबकि उसका धार्मिक और पारंपरिक प्रभाव 15 जनवरी को माना जा रहा है। इसी कारण शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि पहले घोषित 14 जनवरी के अवकाश के स्थान पर 15 जनवरी को अवकाश रखा जाए। संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के अंतर्गत सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इस दिन बैंक, सरकारी कार्यालय और अधिकतर सार्वजनिक संस्थान बंद रहेंगे। साथ ही मकर संक्रांति का सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के बाद 2026 में 26 राजकीय अवकाश हो जाएंगे। पहले जारी सूची के अनुसार 25 सार्वजनिक अवकाश थे। अब मकर संक्रांति की छुट्टी भी घोषित होने के बाद निर्बंधित (ऑप्शनल) अवकाश 31 बचेंगे। गणतंत्र दिवस और होलिका दहन सोमवार पड़ रहे हैं, इनसे पहले शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने से दफ्तरों में लगातार तीन-तीन दिन छुटि्टयां रहेंगी।

यूपी में शीतलहर के चलते 5 जनवरी तक 12वीं तक के स्कूल बंद।

◆ भीषण ठंड के बीच सीएम योगी ने लिया अहम निर्णय।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। प्रदेश में लगातार बढ़ रही शीतलहर और भीषण ठंड को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत समस्त प्रकार के माध्यमिक विद्यालयों को 5 जनवरी तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
तेजी से गिरते तापमान और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए। ठंड से बचाव को लेकर लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की गई है।

जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बहुत ज्यादा ठंड के समय में स्टूडेंट्स घर से अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए सुरक्षित रहें। मौसम ठीक रहने पर 6 जनवरी से स्कूल फिर से खुलने की उम्मीद है। वहीं, अभिभावकों और छात्रों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
यह फैसला तब आया है जब कई जिलों में तापमान रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसी कारण अधिकारियों को छात्रों और निवासियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं।
सीएम योगी ने अधिकारियों को सतर्क रहने के साथ फील्ड इंस्पेक्शन करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को कहा गया है कि वे सभी जिलों में कंबल और अलाव आदि का इंतजाम करें। जिससे ठंड से बचाव मिल सके। साथ ही कहा है कि कोई भी व्यक्ति खुले में ना सोए इसके लिए अधिकारियों को नाइट शेल्टर में सभी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। अधिकारियों को सभी नाइट शेल्टर में पूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। जिससे रहने वालों को खाना और बेसिक सुविधाएं मिल सकें।
सीएम योगी ने जोर दिया कि सभी अधिकारी एक्टिव रहें। रेगुलर तौर पर जिलों का इंस्पेक्शन करें। साथ ही कोल्ड वेव की तैयारियों को लेकर रिपोर्ट दें। इन उपायों में नाइट शेल्टर बनाए रखना, कंबल और अलाव के लिए फ्यूल की सप्लाई पक्का करना, और लोगों को रात में बाहर रहने से रोकने के लिए लोकल अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेटर करना शामिल है। इस दौरान लोगों से अपील की गई है कि वे ऑफिशियल गाइडलाइंस का पालन करें।

साल 2026 में 112 दिन अवकाश, 238 दिन होगी पढ़ाई।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने मंगलवार को जारी किया नया अवकाश कैलेंडर।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने वर्ष 2026 के लिए नया अवकाश कैलेंडर मंगलवार को जारी कर दिया। इसके मुताबिक प्रदेश के राजकीय माध्यमिक स्कूलों में नए कैलेंडर वर्ष में 365 में 238 दिन पढ़ाई होगी और 112 दिन त्योहारों, रविवार व अन्य अवकाश रहेगा। जबकि बोर्ड की परीक्षा 15 दिन होगी।
अवकाश कैलेंडर में ग्रीष्मावकाश, त्योहारों एवं अन्य सार्वजनिक अवकाशों को शामिल किया गया है। निदेशक ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में निर्धारित शैक्षणिक दिवसों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
कैलेंडर जारी होने के साथ ही सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि वे शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन नए कैलेंडर के अनुसार सुनिश्चित करें। नए अवकाश कैलेंडर से विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को वर्ष भर की शैक्षणिक योजना बनाने में सुविधा मिलेगी।


विशेष परिस्थितियों में स्थानीय आवश्यकता के अनुसार प्रधानाचार्य विवेकाधीन की तीन छुट्टी कर सकेंगे। विवाहित शिक्षिकाओं को करवा चौथ की छुट्टी मिलेगी। क्षेत्र विशेष में हरि तालिका तीज या हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी, अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली शिक्षिकाओं को प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रधानाध्यापक या प्रधानाचार्य स्तर से कोई दो छुट्टी दी जाएगी। डीएम के निर्देश पर स्थानीय अवकाश दिए जाएंगे। जबकि जारी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में माध्यमिक विद्यालयों में कुल 112 दिन अवकाश रहेगा व 238 दिन शैक्षणिक कार्य संचालित किया जाएगा।

यूपी शिक्षा व्यवस्था में नया नियम: प्रार्थना के बाद अब न्यूज पेपर पढ़ना अनिवार्य।

छात्रों के बौद्धिक विकास की पहल, समसामयिक ज्ञान पर फोकस।

अपर मुख्य सचिव का पत्र जारी, रोजाना दस मिनट होगा समाचार वाचन।

आदेश के बाद कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में अनिवार्य हुई अखबारों की उपलब्धता।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अब स्कूलों में नया नियम लागू कर दिया गया है। इस नियम के तहत अब सभी सरकारी एवं माध्यमिक स्कूलों में प्रार्थना के बाद अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के बौद्धिक विकास और समसामयिक ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे लागू किया गया है। अब प्रदेश के स्कूलों में प्रार्थना सभा के बाद प्रतिदिन विद्यार्थियों को समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य होगा।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव पार्थ शर्मा द्वारा सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के अनुसार कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए रोजाना कम से कम दस मिनट का समाचार वाचन कराया जाएगा, जिससे छात्रों में पढ़ने की रुचि बढ़े और वे देश-दुनिया की गतिविधियों से अपडेट रहें।
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में हिंन्दी एवं अंग्रजी के अखबारों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। शिक्षक छात्रों को महत्वपूर्ण खबरों की व्याख्या भी करेंगे, ताकि विद्यार्थी समाचारों को समझ सकें और उन पर विचार कर सकें।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों की भाषा क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और सामान्य ज्ञान में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। इसका उद्देश्य शिक्षा को बेहतर बनाना, पढ़ने की आदत को विकसित करने के साथ ही सामान्य ज्ञान को बेहतर करना है। छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करने, मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करने के साथ-साथ तार्किक और आलोचनात्मक सोच को मजबूत करने के उद्देश्य से अखबार पढ़ना अनिवार्य किया गया है। आदेश के अनुसार, स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के अखबार उपलब्ध कराए जाएंगे और इन्हें स्कूल की दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा।
बच्चों में लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। स्कूलों में दोनों हिंदी और इंग्लिश भाषाओं के अखबार दिए जाएंगे। इस पहल के जरिये बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, हर क्षेत्र से जोड़ना है।
यूपी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि इस पहल से न सिर्फ बच्चों की वोकैबलरी मजबूत होगी बल्कि उन्हें रोजाना नए-नए शब्द सीखने का मौका मिलेगा।
विभाग की ओर से जारी नियम के अनुसार अब स्कूलों में हिंदी और इंग्लिश में न्यूज पेपर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका मतलब है कि सरकारी पैसे से ही अखबार खरीदे जाएंगे। पेपर पढ़ने के बाद से बच्चों से बड़ी खबरों के बारे में पूछा जाएगा। इसके साथ ही उन्हें 5 शब्द भी बताने होंगे, जो उन्होंने न्यूज पेपर से सीखे हैं।
जारी आदेश में इस बात का भी जिक्र है कि अखबारों में मौजूद सुडोकू, क्रॉसवर्ड और शब्द पहेलियां भी छात्रों की सोच को विकसित करेंगी और उन्हें तर्क करने में मदद करेगी। इससे उनके मन में कई सवाल पैदा होंगे। अपर मुख्य सचिव पार्थ शर्मा ने बताया कि अलग-अलग सब्जेक्ट के आर्टिकल को पढ़ने से छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित होगी। जिससे वह सही व गलत खबर के बीच फर्क पहचान पाएंगे।

सत्र शुरू होते ही गरमाया सदन, कफ सीरप मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा।

कफ सिरप का कटआउट लेकर साइकिल से विधानसभा पहुंचे सपा विधायक ब्रजेश यादव।

◆ कफ सिरप को लेकर सपा का दावा, कहा- गरीब बच्चों की मौत के लिए भाजपा जिम्मेदार।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। यूपी के विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सपा विधायक ब्रजेश यादव ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। वे साइकिल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे और साथ में एक कटआउट भी चस्पा किया जो जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत के खिलाफ उनका विरोध दर्शाता है। उनकी साइकिल पर लगे कटआउट में लिखा कि, ‘जादुई कफ सिरप, पीने वाला मर जाता है. बेचने वाला दौलतमंद हो जाता है। सत्ता का संरक्षण पाता है। फिर विदेश निकल जाता है।
यह प्रदर्शन ग्रामीण और गरीब परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाता है। विधायक ब्रजेश यादव ने कहा, ‘हमारे राज्य और पूरे देश में चर्चा हो रही है कि भाजपा ने जहरीले कफ सिरप बांटे, जिससे गरीबों के बच्चे मारे गए। लोगों ने पैसे कमाए और विदेश भाग गए। किन्तु भाजपा सरकार उन्हें बचाने में लगी है। बल्कि सरकार को ऐसे लोगों को तुरंत गिरफ्तार करके जेल भेजना चाहिए।

इतना ही नहीं सपा विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है। विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से और हंगामा होने की संभावना है।
बता दें कि हाल के महीनों में देश में कफ सिरप से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में कोल्डरिफ नाम के कफ सिरप से 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले केमिकल मिले। इसी तरह राजस्थान और अन्य राज्यों में भी इसके कई मामले रिपोर्ट हुए। इसके अलावा यूपी में भी कोडीन-बेस्ड कफ सिरप की अवैध सप्लाई का बड़ा रैकेट पकड़ा गया, जिसकी जड़ें वाराणसी तक बताई जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दवा नियमन में सख्ती की जरूरत है ताकि ऐसी त्रासदियां दोहराई न जाएं।
जिसको लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि यह हजारों करोड़ का घोटाला है जिसमें भाजपा सरकार संरक्षण दे रही है। सपा ने इस शीतकालीन विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का ऐलान किया है। विधानसभा सत्र में सपा विधायकों ने अन्य मुद्दों जैसे बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और मतदाता सूची से नाम कटवाने के आरोप आदि पर भी विरोध किया।
फिलहाल इस विरोध प्रदर्शन पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।