यूपी पंचायत चुनाव का बजा बिगुल, आरक्षण का आधार होगी 2011 की जनगणना।

● अब कुल 57691 पंचायतों में होगा मतदान, महिलाओं को मिलेंगी 33 फीसदी सीटें।

● राज्य निर्वाचन आयोग ने भी मतपेटियों के लिए जारी किये ई-टेंडर।

● सूत्रों की माने तो आगामी मार्च-अप्रैल में पंचायत चुनाव होने की  जताई जा रही है प्रबल संभावना।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। यूपी में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है, इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। यूपी के ग्राम पंचायतों के मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 2026 में खत्म हो रहा है। सूबे में करीब 57691 ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, 826 ब्लॉक प्रमुख, 3200 जिला पंचायत सदस्य और 75 जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव होने हैं। यूपी के चुनाव आयोग सूबे में पंचायत चुनाव को अगले साल हर हाल में कराने की तैयारी में है।
जहां आगामी वर्ष 2026 के मार्च-अप्रैल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। साथ ही माना जा रहा है कि यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक सेमीफाइनल की तरह होगा, जो कि सभी राजनीतिक दलों के लिए अपनी ताकत आजमाने का मौका होगा। सत्तारूढ़ बीजेपी के साथ-साथ सपा, कांग्रेस और प्रदेश के छोटे दलों ने भी अकेले मैदान में उतरने की ताल ठोक दी है। जिसके बाद प्रदेश के सियासी समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं। एनडीए और इंडिया अलायन्स के दल भी अलग चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं, जिस कारण लड़ाई और दिलचस्प होती जा रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसमें मतपेटियों के लिए ई-टेंडर आदि जारी कर दिये गए हैं। शनिवार को
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत ग्राम पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। पूर्ववत् हर वर्ग के आरक्षण में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। साथ ही पिछले चुनाव में लागू नियमावली में निर्धारित की गई आरक्षण की रोटेशन की व्यवस्था का भी पालन किया जायेगा।
राजभर ने पंचायतीराज निदेशालय में विभागीय कार्यों की समीक्षा के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ग्राम पंचायत की जो सीट पिछली बार सामान्य, पिछड़ी, महिला या अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए आरक्षित रही, इस बार के चक्रानुक्रम में उसकी श्रेणी में बदलाव हो सकता है। उन्होंने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों का परिसीमन होना है, वहां उनमें सर्वे जारी है। परिसीमन का कार्य पूरा होते ही तत्काल आरक्षण की व्यवस्था पर भी विचार होगा।  पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को बेहतर ढंग से लागू किया जाएगा। जिसके चलते ही कुछ गांवों में बदलाव हुआ है।
राजभर ने कहा कि आरक्षण के कोटे में कोटा लागू कराने के लिए वे जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव किसी दल के सिंबल पर नहीं होता है। ऐसे में इस चुनाव में गठबंधन का सवाल ही नहीं है। सभी जिलों में जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान के पद पर चुनाव लड़ा जाएगा।

यूपी में अब 4 घंटे में होगा पोस्टमार्टम, रात में भी मिलेगी पूरी सुविधा।

● डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर नई गाइडलाइंस लागू।

● वीडियोग्राफी की स्थिति में अब परिजनों से नहीं लिया जायेगा कोई पैसा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पोस्टमार्टम प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
जिसके चलते प्रदेश भर के पोस्टमॉर्टम हाउस में अब नई व्यवस्था लागू हो गई है।
शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं, जिसके तहत अब प्रदेश भर में पोस्टमार्टम अधिकतम चार घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा।
नए दिशानिर्देश के मुताबिक सूर्यास्त के बाद पोस्टमॉर्टम नियमानुसार किया जाएगा। यानी जल्द से जल्द शव के साथ पेपर पोस्टमॉर्टम हाउस भेजा जाएगा। रात में पोस्टमॉर्टम करने की दशा में एक हजार वॉट की कृत्रिम लाइट की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही दूसरे जरूरी संसाधन भी पर्याप्त रूप से पोस्टमॉर्टम हाउस में उपलब्ध होने सुनिश्चित होंगे ताकि 24 घंटे पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई जारी रह सके।
नए दिशानिर्देश के मुताबिक, हत्या, आत्महत्या, यौन अपराध, क्षत-विक्षत शव व संदिग्ध परिस्थितियों में होने वाले मौत के संबंध में रात में पोस्टमॉर्टम नहीं किए जाएंगे। हालांकि अपरिहार्य कारणों में जिला मजिस्ट्रेट व उनके अधिकृत अधिकारी की अनुमति के बाद ही रात में भी पोस्टमॉर्टम कराया जा सकता है। लेकिन पैनल के तहत होने वाले पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। जिसका पैसा अब पीड़ित परिवारजनों से किसी भी दशा में नहीं लिया जाएगा। 
नए दिशानिर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट को ऑनलाइन भी पब्लिश किया जाए। जिसमें किसी भी तरह की कोई कोताही स्वीकार नहीं होगी। पोस्टमॉर्टम हाउस में एक कंप्यूटर ऑपरेटिव और 2 डाटा एंट्री ऑपरेटर सीएमओ द्वारा तैनात किए जाएंगे। शव को अस्पताल से पोस्टमॉर्टम हाउस ले जाने के लिए वाहन का इंतजाम भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ही किया जाएगा। नये नियम के तहत सीएमओ को प्रत्येक जिले में दो शव वाहन की व्यवस्था करनी अनिवार्य होगी। महिला अपराध, रेप, विवाह के पहले 10 सालों में होने वाली महिला की मौत की दशा में पोस्टमॉर्टम पैनल में महिला डॉक्टर को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। साथ ही अज्ञात शव की पहचान के लिए डीएनए सैंपलिंग भी कराई जाएगी। 

क्रिकेटर रिंकू सिंह के साथ 6 अन्य भी बने राजपत्रित अधिकारी।

● स्पोर्ट्स कोटा के तहत सभी खिलाड़ियों को अलग-अलग विभागों में किया गया चयन।

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर रिंकू सिंह की सपा सांसद प्रिया सरोज से शादी हो रही है लेकिन उससे पूर्व ही योगी सरकार ने उन्हें एक बडा तोहफा दे दिया है। क्रिकेटर रिंकू सिंह अब यूपी सरकार में अफसर बनकर अपनी नई पारी की शुरूआत करेंगे। रिंकू सिंह को स्पोर्ट्स कोटे से डायरेक्ट सरकारी अधिकारी बनाया जा रहा है।
अब खेल विभाग ने रिंकू सिंह को बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रिंकू सिंह समेत सात खिलाड़ियों को राजपत्रित अधिकारी के पद पर बुधवार को नियुक्ति के लिए चुन लिया है। क्रिकेटर रिंकू सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग में बीएसए बनाया गया है, जबकि छह अन्य खिलाड़ियों को भी राजपत्रित अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए चुना गया है। नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों में प्रवीण कुमार, राजकुमार पाल, अजीत सिंह, सुश्री सिमरन, सुश्री प्रीति पाल और किरन बालियान प्रमुख हैं। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने बुधवार को रिंकू सिंह को नियुक्ति के संबंध में पत्र जारी करते हुए सभी दस्तावेज शासन को उपलब्ध करने को कहा है।
इसके अलावा खिलाड़ी कोटे में नियुक्ति पाने वालों में नोएडा गोविंदनगर के पैरालंपियन प्रवीण कुमार और गाजीपुर के हाकी खिलाड़ी राज कुमार पाल को पुलिस उपाधीक्षक के पद के लिए चुना गया है तो वहीं इटावा के जैवलिन थ्रोअर अजीत सिंह यादव को जिला पंचायतीराज अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए चयन किया गया है। मेरठ की पैरा एथलीट प्रीति पाल को ग्रामीण विकास विभाग में खंड विकास अधिकारी के पद के लिए चुना गया है। मेरठ की शार्टपुट थ्रोअर किरन बालियान को क्षेत्रीय वन अधिकारी के पद के लिए चुना गया है। वहीं मोदीनगर गाजियाबाद की पैरा-एथलीट सिमरन को जिला पंचायतीराज अधिकारी बनाया गया है। इन सभी खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 के नियम-7 के तहत पदस्थ जाएगा। अब इन खिलाड़ियों को इनका नियुक्ति पत्र संबंधित विभागों द्वारा जारी किया जाएगा। जिसके इन सभी खिलाड़ियों को जल्द अपने जरूरी शैक्षिक व अन्य प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध कराने होंगे।

डीएम की मेज पर रखा कर्तव्यनिष्ठ विचारों की पत्रावली का फोटो, बना चर्चा का विषय।

● जिलाधिकारी संभल की विचारधारा की हर जगह हो रही चर्चा।

● प्रदेशवासी बोले- सभी अधिकारी इसी विचारधारा के हों तो लालफीताशाही पर स्वयं लग जाएगा अंकुश।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के संभल जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया का पदस्थ जनपद में कार्य करना तथा अपनी अलग ही विचारधारा के साथ लोगों की समस्याओं का निस्तारण करना एक अलग पहचान बन गया है। वह हर छोटी-बड़ी समस्या को गंभीरता से लेते हुए उसका निस्तारण करने के बाद ही दम लेते हैं।
संभल में जिलाधिकारी की कुर्सी के नजदीक मेज पर रखी एक अच्छी विचारधारा तथा कर्तव्यनिष्ठ शब्दों के साथ तस्वीर प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गई है।
जहां जिलाधिकारी ने अपने नाम और पद के आगे कुछ शब्द ही अलग अंदाज में लिख रखे हैं तो वही इससे हटकर कुछ और अलग विचार प्रस्तुत किए हैं।
जहां उनकी मेज के आगे ‘आपकी समस्या का अंतिम पड़ाव’ लिखा हुआ है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि व्यक्ति की समस्या आदि जनपद में कहीं किसी भी अधिकारी के पास नहीं सुनी जाती है तो यहां अंतिम आना होगा और समस्या अवश्य ही निस्तारण कराई जाएगी।
इसे छोड़िए इसके अलावा उन्होंने अपनी मेज पर कुछ शब्दों में लिखा है कि “मेरी मेज पर रखी हुई प्रत्येक पत्रावली के पीछे एक व्यक्ति खड़ा अपना कार्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है। मेरा यह कर्तव्य है कि मैं सबसे पहले इस पत्रावली का निस्तारण कर उसे व्यक्ति को राहत प्रदान करूं।” इन शब्दों को अंकित कर एक फोटो के माध्यम से उन्होंने अपनी मेज पर लगा रखा है। जिन्हें देखने के बाद जनपद वासी जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया की कार्य करने की अलग ही विचारधारा देख रहे हैं।
जिलाधिकारी की इस उत्कृष्ट विचारधारा को देख लोग कह रहे हैं कि यदि सभी अधिकारी इसी विचारधारा के साथ कार्य करने लगे तो लालफीताशाही पर तत्काल अंकुश लगने के साथ स्वयं जनता का भला होने लगेगा। हालांकि जो भी हो लेकिन वर्तमान में जिलाधिकारी का कर्तव्यनिष्ठ विचारों वाला फोटो प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गया है जिसके चलते जिलाधिकारी के कार्य करने की विचारधारा की जगह-जगह प्रशंसा होती दिख रही है।

सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में किया योग।

● बोले- योग सनातन ऋषि परंपरा का ऐसा मंत्र, जो देता है स्वस्थ मस्तिष्क।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। ग्यारहवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर मंदिर परिसर में योग किया। जहां उन्होंने मंदिर के दिग्विजय नाथ स्मृति भवन सभागार में योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

गोरखनाथ मंदिर परिसर में सामूहिक योग सत्र के दौरान भारी संख्या में जनप्रतिनिधि भी पहुंच गए तो वहीं कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योग भारत की सनातनी ऋषि परंपरा का एक ऐसा मंत्र है, जो हम सबके लिए एक स्वस्थ मस्तिष्क और स्वस्थ काया प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषियों ने योग के महत्व के बारे में प्राचीन काल से ही बताया है। भारतीय ऋषियों का मान रहा है कि शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम् अर्थात् जितने भी धर्म के साधन हैं, इन सब की प्राप्ति स्वस्थ शरीर से ही की जा सकती है।

स्वस्थ शरीर केवल योग के माध्यम से हो सकता है। उन्होंने कहा कि बिना स्वस्थ शरीर के धर्म का भी कार्य नहीं हो सकता। स्वस्थ शरीर से ही कामनाओं की पूर्ति होती है। भारत ने योग को आत्म कल्याण का माध्यम बनाकर लोक कल्याण के जरिए विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। कहा कि हम लोगों कि विरासत से दुनिया लाभान्वित होती थी और आज भी हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान गोरखपुर सांसद रवि किशन के साथ जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य जन प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

आत्मदर्शन व आत्म साक्षात्कार का आध्यात्मिक दर्शन है योग – सुरेंद्र आर्य

● अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर बोले योगाचार्य सुरेन्द्र आर्य विद्यार्थी।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। योग जीवन दर्शन का प्रबंधन है। योग आत्मानुशासन है। योग मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन शैली है।
21 जून, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर आज जहां भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व योग को अपना रहा है। इसी क्रम में बीते 15 जून से 21 जून तक योग सप्ताह का आयोजन भी किया जा रहा है।
योग को लेकर यूपी के संभल जनपद से योगाचार्य सुरेन्द्र आर्य विद्यार्थी ने कहा कि योग मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन शैली है। योग चित्त को निर्मल और निर्बीज करने की परम आध्यात्मिक विद्या है। उन्होंने बताया कि योग संपूर्ण चिकित्सा का विज्ञान है, योग जीवन का भी विज्ञान है। योग व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और विश्व की संपूर्ण समस्याओं का अमोघ और पूर्ण समाधान है। सुरेंद्र आर्य ने कहा कि योग संपूर्ण जीवन दर्शन है। योग द्वारा आंतरिक और बाह्य रूपों में समग्र आरोग्यता प्राप्त होती है। योग से संपूर्ण सौंदर्य की प्राप्ति होती है। योग से हमारा समग्र व्यक्तित्व निखरता है। आरोग्य, निर्भयता, स्वतंत्रता, सहनशीलता, सहिष्णुता, सुख, शांति, सुरक्षा, प्रेम, करुणा, वात्सल्य, धैर्य, प्रज्ञा, विवेक, सौंदर्य, आनंद, ओज, तेज, सफलता, अमृत योग के ही परिणाम हैं।

उन्होंने कहा कि अपने आपके कुसंस्कारों, दोष दुर्गुणों का परिशोधन, परिमार्जन और उसके स्थान पर सज्जनता, सदाशयता का संस्थापन करना है। आमतौर पर अपने दोष, दुर्गुण दिखाई नहीं पड़ते। यह कार्य विवेक रूपी बुद्धि को अंतर्मुखी होकर करना पड़ता है। आत्म निरीक्षण,आत्मसाधना, आत्म सुधार, आत्मनिर्माण, आत्म विकास, आत्मविश्वास एवं आत्म सम्मान इन सात तत्वों पर कठोर समीक्षण –  परीक्षण की दृष्टि से अपने आप को हर कसौटी पर परखना चाहिए।
जो दोष दिखाई दे उनके निराकरण के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए।
चित्त की वृत्तियों का रुक जाना ही योग है। असत्य, कल्पना और स्वप्नों में रहना मन को सार्थक लगता है। मन भूत की व्यथा में, पीड़ा में, अतीत की स्मृतियों में अथवा भविष्य की चिंता में खोया रहता है।
योग का अर्थ है वर्तमान में जीना, जहां न तो दुख होता है न ही चिंता। वर्तमान में होता है- सृजन। भविष्य का भय न करने वाला व्यक्ति ही वर्तमान का आनंद ले सकता है। वर्तमान ही भूत का निर्माण और भविष्य की आधारशिला तैयार करता है। भूत तथा भविष्य दोनों ही सत्ता विहीन होते हैं। सत्ता तो केवल वर्तमान की होती है, वर्तमान में जीने से ही जीवन में आनंद की प्राप्ति होती है। मन के पार जाने से ही चेतन आत्म का अस्तित्व स्वरूप स्व अनुभव में आता है। अतः योग का अर्थ है- अपनी चेतना, केंद्र या अस्तित्व के साथ जुड़ना, स्वयं की पहचान करना, अन्तस्थ अंतर्यामी परमात्मा को प्रत्यक्ष जानना। पिंड को ब्रह्मांड में और ब्रह्मांड को पिंड में देखना। वास्तविक योग मन से पार जाने के बाद ही आरंभ होता है। मन से परे चेतना का वास्तविक अस्तित्व प्रारंभ होता है। मन में आग्रह, भूत की अस्तित्व विहीन व्यथाएं और भविष्य की अनगिनत कल्पनाएं होती हैं। हम ज्ञात में जीना चाहते हैं, जबकि अज्ञात से भयभीत रहते हैं। इसलिए हम कोई नया काम करने का साहस नहीं जुटा पाते। हमें योग द्वारा स्वास्थ,समृद्ध और संस्कारवान व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व के निर्माण का लक्ष्य बनाना चाहिए।
हमें रोगी को निरोगी, भोगी को योगी तथा स्वस्थ को उपयोगी बनाकर मानव मात्र की स्वच्छता उत्पादकता, सकारात्मक तथा सृजनात्मक और गुणवत्ता बढ़ाकर एक प्रगतिशील सभ्य और समृद्ध समाज तथा राष्ट्र, विश्व का निर्माण करने की दिशा की ओर अग्रसरित होना चाहिए।
जब हम काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद व मात्सर्य के ऊपर हावी हो जाते हैं तब हमें खुशी मिलती है और जब इनमें से कोई भी एक या अधिक हमारे ऊपर हावी हो जाते हैं तो हम दुखी हो जाते हैं। इसलिए योग उनके ऊपर ज्ञानपूर्वक नियंत्रण प्राप्त कर कर शक्ति का रूपांतरण करना सिखाता है। उपरोक्त स्वैच्छिक विचार व्यक्त करते हुए योगाचार्य सुरेंद्र आर्य विद्यार्थी ने कहा कि हमें योग की शरण में आना चाहिए जिससे सारी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर जीवन जीने का मार्ग मिले।

यूपी के नए डीजीपी बने राजीव कृष्ण मित्तल, देर रात ग्रहण किया कार्यभार।

● 1991 बैच के आईपीएस हैं राजीव कृष्ण, हाईटेक पुलिसिंंग के माने जाते हैं एक्सपर्ट।

यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष व डीजी विजिलेंस के पद पर हैं कार्यरत।

प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। पिछले कई दिनों से यूपी में नए डीजीपी को लेकर चल रही उथल-पुथल अब खत्म हो चुकी है। योगी सरकार ने नए डीजीपी की नियुक्त पर मुहर लगा दी है। उत्तर प्रदेश में नए डीजीपी 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण को बनाया गया है। राजीव कृष्ण यूपी में लगातार 5वें कार्यवाहक डीजीपी बनाए गए हैं। 26 जून 1969 को गौतमबुद्ध नगर में जन्मे राजीव कृष्ण ने इलेक्ट्रानिक्स और कम्युनिकेशन में बीई किया हुआ है। उनके पिता का नाम एचके मित्तल है।
राजीव कृष्ण 1991 बैच के आईपीएस हैं। जो यूपी कैडर के एक शानदार आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में यूपी पुलिस के डीजी विजिलेंस और प्रोन्नति भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर तैनात हैं। राजीव कृष्ण आगरा में 2004 में एसएसपी के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया था, जिससे वह चर्चा में आ गए थे।
बीहड़ में सक्रिय अपहरण गिरोह के खिलाफ राजीव कृष्ण ने ही प्रभावी कार्यवाई की थी।
आगरा के एडीजी से पिछले वर्ष ही डीजी विजिलेंस के पद पर तैनात किए गए थे। जहां उन्हें हाईटेक पुलिसिंग के लिए भी जाना जाता है।
एडीजी रहते हुए उन्होंने ऑपरेशन पहचान ऐप के माध्यम से अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाया।
इतना ही नहीं राजीव कृष्ण ने महिला बीट, एंटी रोमियो स्क्वायड की ऑनलाइन मॉनिटरिंग का सिस्टम्स, ईमाल खाने से मुकदमा का ऑनलाइन रिकॉर्ड तक उनकी अलग सोच का परिणाम रहा है।
साइबर अपराध के खिलाफ भी राजीव कृष्ण ने बड़ा अभियान चलाया था। आईपीएस राजीव कृष्ण उत्तर प्रदेश के जनपद गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले हैं।

इस प्रकार रही उनकी शैक्षणिक योग्यता और प्रमोशन।

उनका जन्म 26 जून 1969 को हुआ। उन्होंने बैचलर आफ इंजीनियरिंग इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। इसके बाद यूपीएससी की परीक्षा में सम्मिलित हुए। यूपीएससी की ओर से 1991 में उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की। 1993 में आईपीएस कंफर्मेशन के बाद उनके सीनियर स्केल में प्रमोशन 1995 में हो गया। सिलेक्शन ग्रेड में 9 अगस्त 2005 को उनका प्रमोशन हुआ। 7 अगस्त 2007 को डीआईजी पोस्ट पर प्रमोट किए गए। 9 नवंबर 2010 को आईजी के रूप में प्रमोशन हुआ। राजीव कृष्ण 1 जनवरी 2016 को एडीजी बनाए गए थे।
फरवरी 2024 में योगी सरकार ने उन्हें डीजी के पद पर प्रमोट किया। मुख्यमंत्री ने अब एक और बड़ी जिम्मेदारी दी है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने देश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा का भी आयोजन सफलतापूर्वक कराया। जिसके चलते ही इन्हें अब उत्तर प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक बनाया गया है।